
खाद्य उत्पादन प्रक्रिया में, सूक्ष्मजीवों की संख्या में लगातार परिवर्तन होता रहता है। जब मौजूदा UVC लैम्प पुराना हो जाता है, तो उसका आउटपुट कम हो जाता है; इससे “99.9% सूक्ष्मजीव नाश” का वादा पूरा नहीं हो पाता। व्यवहार में, इसका अर्थ है ऑडिट विफल होना, पुनर्कार्य करना, एवं स्वच्छता प्रक्रियाओं में देरी होना।
Jebo UVC लैम्पों को ऐसे ही डिज़ाइन किया गया है कि वे प्रणाली के डिज़ाइन के अनुसार ही काम करें – अर्थात् सतहों का पूर्ण विसंक्रमण, साथ ही हवा एवं पानी का नियंत्रण भी।
UVC लैम्पों में महत्वपूर्ण बात यह है कि वहाँ वाटेज की तुलना में आउटपुट ही महत्वपूर्ण है। Jebo UVC लैम्पों में 254 नैनोमीटर तरंगदैर्घ्य का उपयोग किया गया है; इससे 1.0 मीटर दूरी पर ≥120 मिलीजूल/सेमी² का आउटपुट प्राप्त होता है। हवा के प्रवाह एवं समय को नियंत्रित करने से E. coli, लिस्टेरिया, सैल्मोनेला जैसे सूक्ष्मजीवों पर ≥3 लॉग-रिडक्शन प्राप्त होता है।
ये लैम्प ओजोन-रहित हैं; इनमें उच्च शुद्धता वाला फिलर है, एवं 9,000 घंटों तक आउटपुट ±5% के भीतर ही रहता है। लक्षित सतह पर तरंगदैर्घ्य 2.5 मिलीवाट/सेमी² से अधिक रहता है; रिफ्लेक्टर की वजह से किरणें सीधी रहती हैं, इसलिए छायादार क्षेत्रों में भी UVC किरणें पहुँच पाती हैं।
खाद्य सुरक्षा हेतु यह बहुत ही महत्वपूर्ण है। Jebo लैम्पों की वजह से प्रणाली का आउटपुट फिर से मूल स्तर पर आ जाता है; इससे स्वच्छता प्रक्रियाएँ 60–90 सेकंड में ही पूरी हो जाती हैं। प्रत्येक चक्र में ऊर्जा की खपत लगभग 12% कम हो जाती है, एवं लैम्पों का विनिमय नियमित रखरखाव के हिस्से के रूप में ही होता है – आपातकालीन स्थिति में नहीं। इससे लगातार अच्छा आउटपुट प्राप्त होता है, एवं अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।
कुछ महत्वपूर्ण बातें: लैम्प का आधार, पिन-टाइप, आर्क-लंबाई एवं बैलास्ट की सुसंगतता जरूर जाँचें। UVC आउटपुट धारा-आधारित है; अगर ड्राइवर उपयुक्त न हो, तो आउटपुट कम हो जाएगा। रिफ्लेक्टर एवं क्वार्ट्ज स्लीव की स्थिति भी जाँचें – ऑक्सीकरण या खरोंचों की वजह से आउटपुट 20% तक कम हो सकता है। लैम्प को साफ दस्तानों से ही हैंडल करें; आर्क पर उंगलियों के निशान न लगें। फिक्सचर का शीतलन एवं हवा का प्रवाह भी जाँचें, ताकि तापमान 90°C से कम ही रहे।